बड़ी राशि की जानकारी नहीं देने पर सजा
सरकारी प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद ज़रूरी है। भारत में सरकारी कर्मचारियों को अपनी संपत्ति और बड़ी लेन-देन की जानकारी नियमित रूप से देनी होती है। सांसद श्री अरुण गोविल ने हाल ही में संपत्ति विवरणों की निगरानी, वार्षिक संपत्ति रिटर्न (IPRs) की तुलना, और अनुपातहीन संपत्तियों के मुद्दों पर सवाल उठाए। यहां इन नियमों, अनुपालन की आवश्यकताओं और उल्लंघनों पर सजा का पूरा विवरण दिया गया है।
वार्षिक संपत्ति रिपोर्टिंग के नियम
केंद्रीय सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1964 और अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 के तहत सरकारी कर्मचारियों को निम्नलिखित करना अनिवार्य है:
- नियुक्ति के समय संपत्ति की जानकारी दें:
- पहली बार नियुक्ति के समय संपत्ति और देनदारियों का विवरण जमा करना ज़रूरी है।
- वार्षिक संपत्ति रिटर्न जमा करें:
- हर साल 31 जनवरी तक अपने वार्षिक अचल संपत्ति रिटर्न (IPRs) संबंधित प्राधिकरण को जमा करना आवश्यक है।
- बड़ी लेन-देन की जानकारी दें:
- यदि चल संपत्ति का लेन-देन दो महीने के मूल वेतन से अधिक है, तो इसकी जानकारी तुरंत संबंधित प्राधिकरण को दें।
निगरानी और अनुपालन
श्री अरुण गोविल द्वारा उठाए गए सवाल:
- क्या संपत्ति विवरण हर साल तुलना की जाती है?
- IPRs समय पर या नहीं जमा करने पर क्या कार्रवाई की जाती है?
- जब संपत्तियां आय के अनुपात में अधिक पाई जाती हैं, तो क्या सजा दी जाती है?
सरकार का उत्तर:
1. संपत्ति विवरण की तुलना:
- वार्षिक IPRs की निगरानी की जाती है और पिछली साल की रिपोर्ट से तुलना कर असमानताओं और बिना स्पष्टीकरण वाली संपत्तियों की पहचान की जाती है।
2. IPRs जमा नहीं करने पर दंड:
- विजिलेंस क्लीयरेंस से वंचित:
- जो कर्मचारी IPRs समय पर जमा नहीं करते, उन्हें विजिलेंस क्लीयरेंस नहीं मिलती। इससे प्रमोशन, प्रतिनियुक्ति और करियर के अन्य अवसरों पर रोक लग जाती है।
- यह आचरण नियमों का उल्लंघन माना जाता है और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाती है।
3. आय से अधिक संपत्तियां:
- कड़ी सजा:
- अगर किसी सरकारी कर्मचारी के पास ज्ञात आय से अधिक संपत्ति पाई जाती है, तो उस पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाती है।
सजा में शामिल हैं:
- सेवा से हटाना: सरकारी नौकरी से स्थायी रूप से हटाना।
- बरखास्तगी: नियमों के अनुसार जांच के बाद पद से हटाना।
अनुपालन सुनिश्चित करना: एक सामूहिक जिम्मेदारी
ये नियम और सजा यह दर्शाते हैं कि सरकार वित्तीय अनियमितताओं के प्रति शून्य सहनशीलता रखती है। नियमित निगरानी और कड़े अनुपालन यह सुनिश्चित करते हैं:
- संपत्ति रिपोर्टिंग में जवाबदेही।
- भ्रष्टाचार की रोकथाम।
- प्रशासन में जनता के विश्वास को बनाए रखना।
सरकारी कर्मचारियों के लिए इन नियमों का पालन करना आवश्यक है। इससे न केवल करियर सुरक्षित रहता है, बल्कि कानूनी समस्याओं से भी बचाव होता है और सार्वजनिक सेवा में पारदर्शिता बढ़ती है।